Sunday, March 29, 2015

प्यार : कुछ मुक्तक - 10










प्यार : कुछ मुक्तक - 10
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'' धनवानों के लिए प्यार है 
        ताज - सरीखी एक इमारत ,
  पढ़े - लिखों के लिए प्यार 
        ढाई अक्षर की एक इबारत ;
  किन्तु प्यार क्या है , जब पूछा 
        किसी प्यार करने वाले से -
  उसने कहा कि सच पूछो तो 
        प्यार खुदा की एक इबादत । '' 

                               - श्रीकृष्ण शर्मा 

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पुस्तक - '' चाँद झील में ''  ,  पृष्ठ - 56



8 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (31-03-2015) को "क्या औचित्य है ऐसे सम्मानों का ?" {चर्चा अंक-1934} पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. मेरी रचना को शामिल करने के लिए आपको धन्यवाद |

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  4. प्यार ऊपर वाले का उपहार है सब के लिए ... भावपूर्ण रचना ...

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  5. धन्यवाद दिगम्बर जी |

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  6. धन्यवाद दिगम्बर जी |

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  7. प्यार खुदा का दिया वह तोफहा है , जो इन्सां की ज़िंदगी को जन्नत बना देता है ,
    सुन्दर अभिव्यक्ति श्री कृष्ण जी

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    1. धन्यवाद डॉ. महेन्द्रग जी .आपने जो प्रोत्साहन दिया |

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