Thursday, January 7, 2016

'' मुनादी '' नामक नवगीत , कवि स्व. श्री श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत संग्रह - '' अँधेरा बढ़ रहा है '' से लिया गया है -









चौराहों पर हुई मुनादी -
बच न सकेंगे अब अपराधी । 
खुश थी रैयत सीधी - सादी । । 

सब कहते - राजा है अच्छा ,
उसे दिया है कुछ ने गच्चा ,
अब करनी सब भरनी होगी ,
वैतरिणी तो तरनी होगी ;
        बोलो - कब तक बच पायेगी ,
        राजा सम्मुख पड़ कर प्यादी । । 
        चौराहों पर हुई मुनादी ..... 

लेकिन राजा बड़ा घाघ था ,
शहद चुआता हुआ नाग था ,
कहता था कुछ , कुछ करता था ,
पर जन - जागृति से डरता था ;
        कोई सरकश सिर न उठाये ,
        संगीनों से खबर छपा दी।।
        चौराहों पर हुई मुनादी ..... 

सरगर्मी से नगर भर गया ,
खतरा घर - घर में पसर गया ,
पतझर में जंगल के अन्दर 
जैसे कोई आग धर गया ;
        सबके चेहरों खौफ लिख गयी ,
        दहशत की वह काली आँधी । । 
        चौराहों पर हुई मुनादी ..... 

चारों तरफ तना अँधियारा ,
लगता है उजियारा हारा ,
ढोल - ढमाकों की ढम्मक - ढम 
चलता है राजा का गारा ;
        हाँके में कसती जाती है ,
        कुछ नव - सिंहों की आज़ादी । । 
चौराहों पर हुई मुनादी -
बच न सकेंगे अब अपराधी । 
खुश थी रैयत सीधी - सादी । । 


                    - श्रीकृष्ण शर्मा 

( कृपया इस नवगीत को  पढ़ कर अपने विचार अवश्य लिखें | आपके विचारों का स्वागत है | धन्यवाद | )
____________________
पुस्तक - '' अँधेरा बढ़ रहा है ''  ,  पृष्ठ - 79 , 80

sksharmakavitaye.blogspot.in
shrikrishnasharma.wordpress.com


सुनील कुमार शर्मा  
पुत्र –  स्व. श्री श्रीकृष्ण शर्मा ,
जवाहर नवोदय विद्यालय ,
पचपहाड़ , जिला – झालावाड़ , राजस्थान .
पिन कोड – 326512

फोन नम्बर - 9414771867



5 comments:

  1. आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल शनिवार (09-01-2016) को "जब तलक है दम, कलम चलती रहेगी" (चर्चा अंक-2216) पर भी होगी।
    --
    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
    --
    हार्दिक शुभकामनाओं के साथ
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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    1. धन्यवाद मयंक जी |

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    2. धन्यवाद मयंक जी |

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    1. धन्यवाद ई. प्रदीप कुमार साहनी जी |

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