Wednesday, November 4, 2015

ज्योति गीत ( तीन ) - '' अँधेरा बढ़ रहा है ! '' नामक नवगीत , कवि स्व. श्री श्रीकृष्ण शर्मा के नवगीत - संग्रह - '' अँधेरा बढ़ रहा है '' से लिया गया है -









अँधेरा बढ़ रहा है ,
बात क्या डर की ?
रखा है दीप आले में ,
जलाओ तो !
       अँधेरा बढ़ रहा है !

यही है दीप ,
जब सूरज नहीं रहता ,
उजाले की 
       यही तो बाँह गहता है ,
तिमिर के अन्ध सागर में 
सहज मन से 
       यही तो रोशनी की कथा कहता है ,
कि जब सब मस्त सोते 
नींद की बाँहों ,
अकेला 
       रात भर लड़ता ,
                  अँधेरों से ,
तनिक दे स्नेह ,
इसका मन बढ़ाओ तो !
       अँधेरा बढ़ रहा है !

बड़ा मुश्किल समय है ,
क्रूर ग्रह घिर कर 
       लगे हैं 
                 जिन्दगी को स्याह करने में ,
ख़ुशी के एक पल को छीन 
हर पल में 
       हजारों 
                  दहशतों का ज़हर भरने में ,
पिशाचों - सिरकटों का दौर ,
यह मावस ,
       सँभल कर ,
       दीप से दीपक जलाओ तो ,
       बबंडर रोशनी का 
       तुम उठाओ तो !
                  अँधेरा बढ़ रहा है !  


                                                        - श्रीकृष्ण शर्मा 

_________________________________
पुस्तक - '' अँधेरा बढ़ रहा है ''  ,  पृष्ठ - 89 , 90

सुनील कुमार शर्मा  
पुत्र –  स्व. श्रीकृष्ण शर्मा ,
जवाहर नवोदय विद्यालय ,
पचपहाड़ , जिला – झालावाड़ , राजस्थान .
पिन कोड – 326512
फोन नम्बर - 9414771867



No comments:

Post a Comment